एक मृत घूमते ब्रह्माण्ड में जीवित
हम यहां ऐसे ही एक आकस्मिक भूमण्डल पर नहीं आये हैं
जैसे अपनी शक्ति से परे का एक कार्य सौंप हमें छोड़ दिया हो;
तथापि इस जटिल अराजकता में जिसे दैवी भाग्य कह पुकारते हैं
और मृत्यु तथा पतन की इस कटुता के मध्य
हम अपने जीवनों पर एक वरदहस्त की सुरक्षा का अनुभव पाते हैं।
संदर्भ : सावित्री
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…