योग का उद्देश्य कोई महान् योगी या अतिमानव होना नहीं है। यह योगको अहंकारपूर्ण ढंगसे ग्रहण करना है और इससे कोई भलाई नहीं हो सकती । इससे पूरी तरह बचो ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…