अगर तुम मृत्यु से बच निकालना चाहते हो तो तुम्हें अपने-आपको किसी भी नश्वर वस्तु से न बांधना चाहिये।
तुम केवल उसी को जीत सकते हो जिससे तुम भय नहीं खाते, और वह जो मृत्यु से भय खाता है वह पहले से ही मृत्यु से पराजित हो चुका है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…