अगर तुम मृत्यु से बच निकालना चाहते हो तो तुम्हें अपने-आपको किसी भी नश्वर वस्तु से न बांधना चाहिये।
तुम केवल उसी को जीत सकते हो जिससे तुम भय नहीं खाते, और वह जो मृत्यु से भय खाता है वह पहले से ही मृत्यु से पराजित हो चुका है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
जीवनयात्रा में समस्त भय, संकट और विपदा का सामना करने के लिए कवच के रूप…
अपने तुच्छ, स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व से बाहर निकलो ओर अपनी भारतमाता के योग्य शिशु बनो ।…