माताजी, क्या यह सच नहीं है कि पुत्र अपने पिता की सेवा करने के लिए बाध्य है ?
एकमात्र उसी को – जिसने स्वयं को पूर्ण रूप से भगवान के अर्पण कर दिया हो – यह अधिकार होता है कि वह अपने माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्य को न निभाये ।
संदर्भ : श्रीमाँ के साथ शांति दोशी का पत्र-व्यवहार
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…