‘मातृवाणी’ में आये हुए इस वाक्य से माताजी का क्या मतलब है :
“जब तुम खाते हो तब तुम्हें यह अवश्य अनुभव करना चाहिये कि स्वयं भगवान ही तुम्हारें द्वारा खा रहे है ?”
इसका अर्थ है भोजन अहंकार या कामना को नहीं बल्कि भगवान को अर्पण करना जो सभी क्रियाओं के पीछे विद्यमान हैं।
संदर्भ : माताजी के विषय में
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…