बालक जब उत्साह से भरा हो तो उस पर कभी पानी न फेरो। उससे कभी यह न कहो, ”देखो, जीवन इस प्रकार का नहीं है। ” बल्कि तुम्हें उसको उत्साहित करना चाहिये, उससे कहना चाहिये, ”हां, अभी तो चीज़ें बेशक उस प्रकार की नहीं है, वे कुरूप प्रतीत होती हैं, परंतु इनके पीछे एक सौंदर्य है जो अपने-आपको प्रकट करने का प्रयत्न कर रहा है। उसी के लिये प्रेम पैदा करो, उसी को आकर्षित करो। उसी को अपने सपनों ओर महत्वाकांक्षाओं का विषय बनाओ ।
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५७-१९५८
समाजवादी चाहते हैं पूंजीवाद को खत्म करना, किन्तु ऐसा न करना बेहतर होगा। वे राष्ट्रीय…
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…