” जब मैं ‘अज्ञान’ में सोया पड़ा था,
तो मैं एक ऐसे ध्यान-कक्ष में पहुंचा
जो साधू-संतों से भरा था |
मुझे उनकी संगति उबाऊ लगी और
स्थान एक बंदीगृह प्रतीत हुआ;
जब मैं जगा तो
भगवान् मुझे एक बंदीगृह में ले गये
और उसे ध्यान-मंदिर
और अपने मिलन-स्थल में बदल दिया | ”
संदर्भ: कारावास की कहानी
मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…
अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…
कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…