बंदीगृह और ध्यान-मंदिर

” जब मैं ‘अज्ञान’ में सोया पड़ा था,

तो मैं एक ऐसे ध्यान-कक्ष में पहुंचा

जो साधू-संतों से भरा था |

मुझे उनकी संगति उबाऊ लगी और

स्थान एक बंदीगृह प्रतीत हुआ;

जब मैं जगा तो

भगवान् मुझे एक बंदीगृह में ले गये

और उसे ध्यान-मंदिर

और अपने मिलन-स्थल में बदल दिया | ”

संदर्भ: कारावास की कहानी 

 

शेयर कीजिये

नए आलेख

मृत्यु की अनिवार्यता

जब शरीर बढ़ती हुई पूर्णता की ओर सतत प्रगति करने की कला सीख ले तो…

% दिन पहले

चुनाव करना

हर एक के जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब उसे दिव्य मार्ग और…

% दिन पहले

अनुभव का क्षेत्र

अगर तुम कुछ न करो तो तुम्हें अनुभव नहीं हो सकता। सारा जीवन अनुभव का…

% दिन पहले

सच्चा उत्तर

एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…

% दिन पहले

आश्वासन

मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…

% दिन पहले

प्रार्थना

हे प्रभु ! तू क्या मुझे यह शिक्षा देना चाहता है कि जिन सब प्रयासों-…

% दिन पहले