यदि तुम निर्बलता के विचार को दूर फेंक दो तो शक्ति लौट आएगी। किन्तु प्राणमय भौतिक सत्ता में सदा ही कोई ऐसी चीज़ होती है, जो अधिक निर्बल और बीमार होने से प्रसन्न होती है , जिससे यह अपनी करुणाजनक अवस्था का अनुभव कर सकें और उसके लिए रो-धो सकें ।

संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (चतुर्थ भाग)

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