आज हमारी शिक्षा कौन – से दोषों और भ्रांतियों का शिकार है ? हम उनसे कैसे बच सकते हैं ?
१ . सफलता, आजीविका और धन को दिया जाने वाला प्रायः ऐकांतिक महत्व ।
२. ‘आत्मा’ के साथ संपर्क और सत्ता के ‘सत्य’ के विकास और उसकी अभिव्यक्ति की परम आवश्यकता पर ज़ोर देना ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…