किसी कठिनाई के कारण बेचैन या निरुत्साहित मत होओ बल्कि चुपचाप और सरल भाव से अपने को माताजी की शक्ति की ओर खोले रखो और उसे अपने अंदर परिवर्तन ले आने दो।
संदर्भ : माताजी के विषय में
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…