जो लोग सत्यके अनुसार अपना-जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, उनके लिये एकमात्र मार्ग है भागवत उपस्थिति के प्रति सचेतन होना और केवल उन्हीं की इच्छा के अनुसार जीवन बिताना ।
अशुभ और कष्ट से बचने का एकमात्र मार्ग यही है; सदा शांति, प्रकाश और आनंद में निवास करनेका भी यही एकमात्र मार्ग है ।
सन्दर्भ : ‘विचार और सूत्र’ के प्रसंग में
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…