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आध्यात्मिक आघात

आघात और परीक्षाएँ हमेशा भागवत कृपा के रूप में हमें अपनी सत्ता में वे बिन्दु दिखाने आती हैं जहां हमारे अंदर कमी है और जिन गतिविधियों में हम अपनी मानसिक सत्ता और प्राणिक सत्ता की चिल्लपों सुन कर अपनी अंतरात्मा की ओर पीठ कर लेते हैं ।

अगर हम इन आध्यात्मिक आघातों को उचित नम्रता के साथ स्वीकारना जानें तो हम निश्चय ही एक छलांग में काफी दूरी पार कर लेंगे।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

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