यदि तुम्हारें ह्रदय और तुम्हारी आत्मा में आध्यात्मिक परिवर्तन के लिए सच्ची अभीप्सा jहै, तब तुम्हें पथ और ‘पथ-प्रदर्शक’ दोनों मिल जायेंगे। मात्र मानसिक खोज तथा जिज्ञासा आत्मा के प्रवेश-द्वार को खोलने के लिए काफ़ी नहीं हैं।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…