सच्चाई के साथ अपने-आपको खोलो। इसका अर्थ यह है कि बिना अपने अन्दर कुछ भी छिपाये हुए, पूरी तरह खोलो; ऐसा न करो कि अपना एक भाग तो भगवान के कर्म को दो और बाक़ी सब अपने पास रखो। आंशिक उत्सर्ग तो करो, परंतु अपनी प्रकृति की अन्य क्रियाओं को अपने लिए बचाये रखो। सब कुछ पूरी तरह खुला होना चाहिये; अपने किसी भाग को छिपाये रखना या उसे भगवान की ओर से बंद रखना कपट है।
निष्ठा के साथ अपने-आपको खोलो। इसका अर्थ है, हमेशा पूरी तरह और सतत रूप से अपने-आपको खुला रखो, यह नहीं कि एक दिन तो खुले रहो और दूसरे दिन मुंद जाओ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
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