व्यक्ति को अपने स्वभाव और अपनी दुर्बलताओं के अनुसार अपने लिए एक अनुशासन बना लेना चाहिये जिसका बिना हर-फेर किये अनुसरण करना चाहिये। उदाहरण के लिए, कभी झगड़ा न करो, जब कोई कुछ अप्रिय चीज़ कहे या करे तो कभी उत्तर न दो। जब तुम सहमत न होओ तो बहस मत करो। स्पष्ट है कि जब चीज़ें या लोग वैसे न हों जैसे तुम चाहते हो तो कभी झल्लाओ मत।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड -१७)
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…