जब तुम प्रकाश को देखते हो तो इसे अंतर्दर्शन कहते है । जब तुम प्रकाश को अपने अन्दर प्रवेश करता हुआ अनुभव करते हो तो यह अनुभूति होती है, जब प्रकाश तुम्हारें अन्दर आकार स्थित हो जाता है और अपने साथ आलोक और ज्ञान को लाता है तो यह साक्षात्कार कहलाता है । परन्तु समान्यतया अंतर्दर्शन अनुभूति भी कहलाते हैं ।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र
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