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श्रीअरविंद के पत्र

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भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है
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भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

by श्रीअरविंद 1 सप्ताह ago1 सप्ताह ago
मिथ्यात्व क्या है
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मिथ्यात्व क्या है

by श्रीअरविंद 2 महीना ago2 महीना ago
  • 410
    श्रीअरविंद अपने कक्ष में
    श्रीअरविंद के वचन

    साधना के दौरान थकान

    साधना के दौरान इस तरह की थकान कई कारणों से आ सकती है : १. शरीर जितना ले सकने के लिए तैयार हो उससे ज़्यादा...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद के वचन

    भय

    जिस चीज़ से मनुष्य डरता है, वह तब तक आते रहने की प्रवृत्ति रखती है, जब तक की मनुष्य सीधे उसके सामने ताकने की और अपनी...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    महर्षि श्रीअरविंद
    श्री माँ के वचन

    पवित्रता

    केवल ईश्वर के ही प्रभाव से प्रभावित होना, और किसी के प्रभाव को स्वीकार न करना – यही पवित्रता है । संदर्भ : श्रीअरविंद के...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    ध्यान का अभ्यास

    यदि किसी को ध्यान का अभ्यास न हो तो आरम्भ में ही दीर्घकाल तक ध्यान लगाकार श्रांत होने की कोई आवश्यकता नहीं है ; क्योंकि...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्री माँ कक्षा लेते हुये
    श्रीअरविंद के वचन

    मुक्ति

    प्रश्न : लोगों में ऐसा विश्वास है कि यदि कोई, जिसने अपने पूरे जीवन में भगवान को याद नहीं किया हो, पर केवल मृत्यु के...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    महर्षि श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    पारिवारिक बंधन और आध्यात्मिकता

    जब कोई आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करता है तो पारिवारिक बंधन, जो सामान्य प्रकृति की चीज़ है, विलीन हों जाता है — मनुष्य सभी पुरानी...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    महर्षि श्रीअरविंद
    श्रीअरविंद के वचन

    अलग-अलग तरीक़ा

    तुम यह भूल जाते हो कि मनुष्य अपने स्वभाव में विभिन्न होते हैं और इसलिये प्रत्येक व्यक्ति अपने निजी तरीके से साधना में आयेगा —...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    दमन

    आपने कहा है कि गलत गति का दमन करने से वह बस दब जाती है, यदि उसे पूरी तरह निकालना हो तो उसे एकदम त्यागना...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 2 वर्ष ago2 वर्ष ago
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    प्रभु श्रीअरविंद और उनके विचार
    श्रीअरविंद के वचन

    सांसारिक जीवन का त्याग

    सत्ता के पूर्ण आध्यात्मिक जीवन के लिये तैयार हों जाने से पहले सांसारिक जीवन का त्याग करना लाभदायी नही होता। ऐसा करने का अर्थ है...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 3 वर्ष ago3 वर्ष ago
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    प्रभु श्रीअरविंद और जगदजननी श्री माँ
    श्रीअरविंद के वचन

    शान्ति पर्याप्त नहीं

    शान्ति आवश्यक आधार है पर शान्ति पर्याप्त नहीं है। यदि शान्ति प्रबल और स्थायी हो तो वह आंतर सत्ता को मुक्त कर सकती है जो...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 3 वर्ष ago3 वर्ष ago

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  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

    घर और काम में साधना

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

    अपात्रता का भाव

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    दो चीज़ें

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    कभी मत बुड़बुड़ाओ

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    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

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    आंतरिक परिवर्तन

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    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    निराशा से दूर रहो

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ कक्षा लेते हुए
    क्या बच्चो को सज़ा देनी चाहिये?

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सच्चा सुख कब ?

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    तेरा आश्वासन

    तेरा आश्वासन

  • श्रीअरविंद का चित्र
    आध्यात्मिक जीवन में सफलता

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  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    प्रार्थना

    प्रार्थना

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    समग्र योग का अर्थ

    समग्र योग का अर्थ

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    श्रद्धा के नेत्र

    श्रद्धा के नेत्र

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    माताजी की शक्ति

    माताजी की शक्ति

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