760 श्रीअरविंद के वचनभगवान की निंदाजो विफलता और अपूर्णता की निंदा करता है वह भगवान की निंदा कर रहा है; वह अपनी ही आत्मा को सीमाबद्ध करता और अपनी ही... by श्रीअरविंद 1 वर्ष ago1 वर्ष ago