श्रीअरविंद के वचन

खुद को जानना

... मनुष्य का कर्म एक ऐसी चीज़ है जो कठिनाइयों और परेशानियों से भरी हुई है, यह एक ऐसे बीहड़…

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रूपांतर

यदि अपनी भक्ति और समर्पण के पीछे तुम अपनी इच्छाओं को, अहंकार की अभिलाषाओं और प्राणों के हठों को छिपा…

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गृहस्थ तथा सन्यासी

यहाँ (श्रीअरविंद आश्रम) गृहस्थ तथा सन्यासी के बीच भेद करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि हमारे लिए वह…

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पहली आवश्यकता

​अगर मन चंचल हों तो योग की नींव डालना संभव नही । सबसे पहले यह आवश्यक है कि मन अचंचल…

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केवल अंश ही

पूर्णयोग के साधक को यह अवश्य स्मरण रखना चाहिये कि कोई भी लिखित शास्त्र नित्य ज्ञान के केवल कुछ एक…

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श्रद्धा और समर्पण

तुम्हारी श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण जितने अधिक संपूर्ण होंगे उतना ही अधिक तुम कृपापात्र और सुरक्षित होओगे ! और यदि…

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आन्तरिक एकाग्रता की साधना

आन्तरिक एकाग्रता की साधना में निम्नलिखित चीजें सम्मिलित हैं : १. हृदय-केन्द्र में चेतना को स्थिर करना तथा वहां भगवती…

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सतत उपस्थिति

​हमेशा इस तरह रहो मानों तुम परात्पर प्रभु और भगवती माता की आंखों के एकदम नीचे हो । कोई ऐसा…

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चैत्य पुरुष का प्रभुत्व

एक बच्चे की तरह बन जाना और अपने-आपको संपूर्णतः  दे देना तब तक असम्भव है , जब तक कि चैत्य…

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साधना में दृढ़ आधार

समता के बिना साधना में दृढ़ आधार नहीं बन सकता। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी अप्रिय हों, दूसरों का व्यवहार चाहे कितना…

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