श्रीअरविंद और श्रीमाँ का प्रभाव
श्रीअरविंद तथा श्रीमाँ के प्रभाव को ग्रहण करने के लिए श्रद्धा के साथ-साथ आवश्यकता है बस आध्यात्मिक पथ का अनुसरण करने के लिए पूर्ण सच्चाई...
श्रीअरविंद तथा श्रीमाँ के प्रभाव को ग्रहण करने के लिए श्रद्धा के साथ-साथ आवश्यकता है बस आध्यात्मिक पथ का अनुसरण करने के लिए पूर्ण सच्चाई...
आपने कहा है कि गलत गति का दमन करने से वह बस दब जाती है, यदि उसे पूरी तरह निकालना हो तो उसे एकदम त्यागना...
यह आश्रम दूसरे आश्रमों की तरह नहीं है – यहाँ के सदस्य सन्यासी नहीं हैं, वास्तव में यहाँ योग का एकमात्र लक्ष्य मोक्ष नहीं है।...
यह तेरे विचरण की धरती एक सीमा है जिसने स्वर्ग को विलग कर दिया है; यह तेरे जीवन-यापन की विधि उस ज्योति को जो तू...
इस आश्रम का निर्माण आम तौर पर ऐसी संस्थाओं के लिए निर्धारित एक-समान उद्देश्य की अपेक्षा अन्य उद्देश्य के साथ किया गया है जो संसार...
देखा है जिन्होने मुझे, कभी न संतप्त वे। संदर्भ : सावित्री
जो मन की पहुँच से अति परे है मैं वह परम गुह्यता हूं, सूर्यों की श्रमसाध्य परिक्रमाओं की मैं लक्ष्य हूं; मेरी ज्वाला और माधुर्य...