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श्रीअरविंद

Posted by श्रीअरविंद

  • 330
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रीअरविंद के वचन

    योग की शुरुआत कैसे ?

    जब मैं योग के विषय में कुछ भी नहीं जानता, यह भी नहीं जानता कि क्या करना चाहिये, तब मैं योग कैसे कर सकता हूं...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 6 वर्ष ago6 वर्ष ago
  • 160
    महर्षि श्रीअरविंद अपने कक्ष में
    श्रीअरविंद के वचन

    अपने आप को खोलो

    सच्चाई के साथ अपने-आपको खोलो। इसका अर्थ यह है की बिना अपने अंदर कुछ भी छिपाये हुए, पूरी तरह खोलो; ऐसा न करो कि अपना...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 6 वर्ष ago6 वर्ष ago
  • 180
    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    निम्न प्रकृति और उसकी बाधाएँ

    निम्न प्रकृति तथा इसकी बाधाओं पर अधिक सोच-विचार करना भूल है क्योंकि यह साधना का नकारात्मक पहलू है। उन पर नजर रखनी चाहिये और उनकी...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 6 वर्ष ago6 वर्ष ago
  • 270
    Sri Aurobindo in his room
    श्रीअरविंद के वचन

    प्रकाश – श्रीअरविन्द की कविता

    प्रकाश, अन्तहीन प्रकाश! अंधेरे को नहीं अब अवकाश, जीवन की अज्ञानी खाइयां तज रहीं अपनी गोपनता : विशाल अवचेतन-गहराइयां जो पहले अज्ञात थीं फैली हैं...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 430
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ मीरा अल्फ़ासा का बहुत सुंदर चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    हमारा उद्देश्य

    योगी, सन्यासी, तपस्वी बनना यहाँ का उद्देश्य नहीं हैं। हमारा उद्देश्य है रूपांतर, और तुमसे अनंतगुना बड़ी शक्ति के द्वारा ही यह रूपान्तर सम्पन्न किया...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 240
    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रीअरविंद के वचन

    दृढ़ श्रद्धा बनाये रखो

    किसी भी तरह के हतोत्साह को अपने ऊपर हावी मत होने दो और ‘भागवत कृपा’ पर कभी अविश्वास न करो। तुम्हारे बाहर, तुम्हारे चारों ओर...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 330
    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    तरु

    एक तरु रेतीले सर-तीर बढ़ाये अपने लंबे डाल अंगुलियों से ऊपर की ओर चाहता छूना गगन विशाल ।   किन्तु पायेंगे क्या वे स्वर्ग प्रणय-रस...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 240
    श्रीअरविंद का चित्र
    श्रीअरविंद के वचन

    समस्त योग का उद्देश्य

    चेतना के परिवर्तन द्वारा वस्तुओं की बाहरी प्रतीतितियों से निकल कर उनके पीछे की सच्चाई में जाना समस्त योग का लक्ष्य है। उसके साथ किसी...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago
  • 510
    The Mother of Sri Aurobindo Ashram
    श्रीअरविंद के वचन

    माताजी की सतत उपस्थिति

    ​माताजी की सतत उपस्थिति अभ्यास के द्वारा आती हे; साधना में सफलता पाने के लिये भागवत कृपा अत्यंत आवश्यक है, पर अभ्यास ही वह चीज है जो...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago6 वर्ष ago
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    श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    श्रीअरविंद के वचन

    श्रीमाँ की ज्योति

    कुछ लोगो को श्रीमाँ के चारों और ज्योति आदि के दर्शन होते हैं पर मुझे नहीं होते । मेरे अंदर क्या रुकावट है ? यह...

    श्रीअरविंद
    by श्रीअरविंद 7 वर्ष ago7 वर्ष ago

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3 conditions of yoga auroville bases of yoga Mirra Alfassa Priti Das Gupta Sri Aurobindo Ashram sri aurobindo The Mother The Mother of Sri Aurobindo Ashram Pondicherry The Mother on Sports अध्यात्मिकता आंरोंविल आश्वासन कृपा निद्रा और स्वप्न पूर्ण योग प्रीति दास गुप्ता भागवत उपस्थिती भारत के लिये संदेश माताजी की झाकियां माताजी के वचन भाग-१ माताजी के वचन भाग-२ माताजी के वचन भाग - ३ माताजी के विषय में मातृवाणी योग योग समन्वय यौवन वयवहारिक ज्ञान साधकों के लिये विचार और सूत्र के प्रसंग में विश्वास व्यावहारिक ज्ञान साधकों के लिये शिक्षा के ऊपर श्रद्धा श्री अरविंद श्रीअरविंद श्रीअरविंद के वचन श्री अरविद श्री माँ श्री माँ अपने बारे में श्री माँ के बारें में श्री माँ के बारे में श्री माँ के संस्मरण श्री माँ शरीर के बारें में साधना साधना के संकेत श्री माँ द्वारा
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    विनम्रता

    विनम्रता

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    विनम्र बनने का गलत तरीका

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    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

    आध्यात्मिक जीवन की बाधा

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    मैं तुम्हारे साथ हूं

    मैं तुम्हारे साथ हूं

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    सतत ‘उपस्थिती’

    सतत ‘उपस्थिती’

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    आत्मा का अनुगमन

    आत्मा का अनुगमन

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    पूंजीवाद

  • स्थायी अचंचलता

    स्थायी अचंचलता

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    शांति मंत्र

    शांति मंत्र

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    घर और काम में साधना

    घर और काम में साधना

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    अपात्रता का भाव

    अपात्रता का भाव

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    दो चीज़ें

    दो चीज़ें

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    कभी मत बुड़बुड़ाओ

    कभी मत बुड़बुड़ाओ

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

    सचेतन अभीप्सा की अवस्था

  • श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
    आंतरिक परिवर्तन

    आंतरिक परिवर्तन

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    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

    भागवत तत्त्व आवश्यक वस्तुओं को लिये चलता है

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    निराशा से दूर रहो

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    क्या बच्चो को सज़ा देनी चाहिये?

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