विभिन्न मूल्य रखने वाले लोग एक साथ, सामंजस्य मैं कैसेे रह सकते और काम कर सकते हैं?

 

इसका समाधान यह है कि अपने अंदर गहराइयों में जाओ और उस जगह को पा लो जहां सभी भेद मिल कर सारभूत और शाश्वत ‘ऐक्य’ का निर्माण करते हैं |

‘श्री मातृवाणी'(खंड १३, पृष्ठ २१७)

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