भौतिक चेतना के साथ सम्बंध रखने वाली किसी भी चीज़ के लिए लोभ, तथाकथित आवश्यकताओं और किसी भी प्रकार के आराम के लिए लोभ – यह साधना मार्ग की सबसे गंभीर बाधाओं में से एक है ।
लोभ से तुम जो भी छोटी-मोती तुष्टियाँ पाते हो उनमें से हर एक लक्ष्य की ओर एक पग पीछे हटना है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…