यह निश्चित है कि बिना किसी कष्ट के सत्य बोल सकने के लिये सबसे अच्छा ढंग है कि हम अपना व्यवहार सदा इस प्रकार रखे कि हमें अपना कोई भी कार्य छुपाना न पड़ें। इसके लिये प्रतिक्षण हमें यह याद रखना चाहिये कि हम भगवान के सम्मुख हैं। कारण, वचन की सच्चाई कार्य की सच्चाई की मांग करती है। सच्चा मनुष्य वह है जो अपने वचन और कर्म से सब पाखंड को निकाल देता है।
संदर्भ : पहले की बातें
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
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हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…