श्री माँ की उपस्थिती

श्रीमाँ की उपस्थिती हमेशा उपस्थित रहती है; लेकिन अगर तुम अपने ही भरोसे क्रिया करना चाहो-चीजों पर अपने ही विचार, अपनी ही धारणाएँ, अपनी ही इच्छा और मांग थोपना चाहो तो बहुत सम्भव है कि उनकी उपस्थिती आच्छादित हो जाये; वे तुम्हें अपने से दूर नहीं करती, तुम ही हो जो उनसे पीछे हट जाते हो ।

संदर्भ : माताजी के विषय में 

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