क्या यह हो सकता है कि एक व्यक्ति जो श्रीअरविंद की ओर खुला है, माँ की ओर खुला न हो ? क्या यह बात ठीक है कि जो कोई भी श्रीमाँ की ओर खुला हो , वह श्रीअरविंद की ओर भी खुला है ?
श्रीमाँ के बारे में कथन सही है। यदि कोई श्रीअरविंद की ओर खुला है, लेकिन माताजी की ओर नहीं, तो उसका अर्थ यह है कि वास्तव में वह श्रीअरविंद की ओर भी खुला हुआ नहीं हैं ।
संदर्भ : माताजी के विषय में
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…