जो लोग अपनी आजीविका के लिए तुम पर निर्भर हैं उनके साथ तुम्हें बहुत शिष्ट होना चाहिये। अगर तुम उनके साथ बुरा व्यवहार करो तो उन्हें बहुत खटकता है, परंतु नौकरी छूट जाने के भाय से वे तुम्हारें मुंह पर जवाब नहीं दें सकते ।
अपने से बड़ों के साथ रूखे होने में कुछ प्रतिष्ठा हो सकती है, परंतु जो तुम पर आश्रित हैं, उनके साथ तो बहुत शिष्ट होने में ही प्रतिष्ठा है ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
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