दर्शन संदेश १५ अगस्त २०१८ (२/४)
तुम्हें हमेशा यह श्रद्धा रखनी चाहिये कि निम्न प्रकृति उभरने की चाहे जितनी कोशिश करे, चाहे जितने विरोधी प्रहार हों, विजय तुम्हारी ही होगी और रूपान्तर सुनिश्चित है।
‘प्रकाश’ की विजय में दृढ़ विश्वास रखो और जड़-भौतिक के प्रतिरोधों तथा स्वयं मानव व्यक्तित्व के रूपांतर के प्रतिरोध का सामना शान्त समचित्ता के साथ करो।
भले बहुत ज़्यादा अंधकार हो – और यह जगत उससे भरा हुआ है, मनुष्य का भौतिक मन भी उससे लबालब है – फिर भी अन्ततोगत्वा सच्चे प्रकाश की एक किरण, दसगुने अंधकार पर भी विजय पा सकती है। इस पर विश्वास रखो और हमेशा इसी से चिपके रहो।
संदर्भ : श्रीअरविंद के पत्र (भाग-२)
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…
अवतार की सम्भावना पर विश्वास करने या न करने से प्रकट तथ्य पर कोई फ़र्क़…
यदि चैत्य पुरुष की प्रकृति जाग्रत हो जाए, अपने पीछे विद्यमान माताजी की चेतना और…
भागवत चेतना की विभिन्न अवस्थाएँ होती हैं। रूपांतर की भी विभिन्न अवस्थाएँ होती है। पहली…
मधुर मां, हम ईर्ष्या और प्रमाद से कैसे पिण्ड छुड़ा सकते या उन्हें ठीक कर…