अब अपनी प्राण-सत्ता के द्वार पर यह नोटिस लगा दो : ‘अब यहाँ किसी मिथ्यात्व का आना माना है।’ और फिर वहाँ एक संतरी बैठा दो जो यह देखे कि इस नोटिस के अनुसार कार्य हो रहा है ।
संदर्भ : माताजी के विषय में
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…