श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

मानवजाति की भलाई

जो व्यक्ति पूर्ण योग की साधना करना चाहता है  उसके लिये मानवजाति की भलाई अपने-आप मे लक्ष्य नहीं हो सकती, यह तो केवल एक परिणाम और फल है । मानव-अवस्थाओं को सुधारने के समस्त प्रयत्न, उन्हीं अवस्थाओं के द्वारा प्रेरित तीव्र उत्साह और लगन के होते हुए भी  , अंत में बुरी तरह असफल हीं हुए हैं । इसका कारण यह है कि मानव जीवन की अवस्थाओं का रूपांतर केवल तभी हो सकता हैं जब उससे पहले एक प्रारंभिक रूपांतर, अर्थात् मनुष्यों की चेतना का रूपांतर साधित हों जाये, या कम-से-कम उन थोड़े-से विशिष्ट व्यक्तियों की चेतना का रूपांतर तो हो हीं जाये जो एक अधिक व्यापक रूपांतर का आधार तैयार कर सकते हों ।

संदर्भ : शिक्षा पर 

शेयर कीजिये

नए आलेख

प्रार्थना

अब, हे परमेश्वर, चीजें बदल गयी है। विश्राम और तैयारी का काल समाप्त हो गया…

% दिन पहले

मृत्यु की अनिवार्यता

जब शरीर बढ़ती हुई पूर्णता की ओर सतत प्रगति करने की कला सीख ले तो…

% दिन पहले

चुनाव करना

हर एक के जीवन में एक ऐसा क्षण आता है जब उसे दिव्य मार्ग और…

% दिन पहले

अनुभव का क्षेत्र

अगर तुम कुछ न करो तो तुम्हें अनुभव नहीं हो सकता। सारा जीवन अनुभव का…

% दिन पहले

सच्चा उत्तर

एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…

% दिन पहले

आश्वासन

मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…

% दिन पहले