जब तुम भौतिक जीवन की कोई चीज़ बदलना चाहो, चाहे वह चरित्र हो या अंगों की संचालन-क्रिया हो या आदतें, तुम्हें स्थिर अधव्यसाय के साथ वही चीज़, उसी तीव्रता के साथ सौ बार करने के लिए तैयार रहना चाहिये जिस तीव्रता के साथ तुमने पहली बार प्रयास किया था, और इस तरह करना चाहिये मानों पहले कभी न किया हो।
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५५
समता के बिना साधना में दृढ़ आधार नहीं बन सकता। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी अप्रिय…
भारत को फिर से अपनी आत्मा को पाना और अभिव्यक्त करना होगा । संदर्भ : माताजी…
सोने से पहले, जब तुम सोने के लिए लेटो, तो भौतिक रूप से अपने-आपको शिथिल…
मधुर माँ, क्या नींद में अपने ऊपर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है ? उदाहरण…
व्यापक दृष्टि से विचार करने पर मुझे ऐसा लगता है कि प्रचार करने योग्य सबसे…
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…