जब तुम भौतिक जीवन की कोई चीज़ बदलना चाहो, चाहे वह चरित्र हो या अंगो की संचालन-क्रिया हो या आदतें, तुम्हें स्थिर अध्यवसाय के साथ वही चीज़, उसी तीव्रता के साथ सौ बार करने के लिए तैयार रहना चाहिये जिस तीव्रता के साथ तुमने पहली बार प्रयास किया था, और इस तरह करना चाहियें जिस तीव्रता के साथ तुमने पहली बार प्रयास किया था, और इस तरह करना चाहिये मानों पहले कभी न किया हो।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५५

शेयर कीजिये

नए आलेख

सच्ची वीरता

तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…

% दिन पहले

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले

आशा

हमारी प्रकृति न केवल संकल्प और ज्ञान के क्षेत्र में प्रान्त है बल्कि शक्ति के…

% दिन पहले

परमात्मा हास्यप्रिय है

श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…

% दिन पहले