प्रकृति की बैचेन अनिवार्यता

हमारी प्रकृति भ्रांति तथा क्रिया की बेचैन अनिवार्यता के आधार पर कार्य करती है, भगवान अथाह निश्चलता में मुक्त रूप से कार्य करते हैं। यदि आत्मा पर इस निम्न प्रकृति की पकड़ को रद्द करना हैं तो हमें प्रशांति के उस अगाध तल में छलांग लगानी होगी और वही बन जाना होगा ।

संदर्भ : योग समन्वय

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