पृथ्वी के आरम्भकाल से जब भी और जहाँ भी व्यक्तिगत रूप से दैवी चेतन की अभिव्यक्ति की संभावना रही है, मैं वहाँ विद्यमान रही हूँ ।
संदर्भ : माताजी का अजेंडा (भाग – १)
तुम्हें जो चीज़ जाननी चाहिये वह है, ठीक तरह से यह जानना कि तुम जीवन…
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…