पृथ्वी के आरम्भकाल से जब भी और जहाँ भी व्यक्तिगत रूप से दैवी चेतन की अभिव्यक्ति की संभावना रही है, मैं वहाँ विद्यमान रही हूँ ।
संदर्भ : माताजी का अजेंडा (भाग – १)
क्या अपने-आपको बुरा-भला कहना प्रगति करने का अच्छा उपाय है ? अपने-आपको बुरा भला-भला…
मधुर माँ, हम स्वप्न में अच्छे और बुरे में कैसे फ़र्क़ कर सकते हैं। सिद्धांत…
(अधिकतर साधक) अहंकारी होते हैं और वे अपने अहंभाव को अनुभव या स्वीकार नहीं करते।…