दर्शन दिवस और विरोधी शक्तियां

यह बहुधा घटित होता है कि दर्शन-दिवस के समीप आते ही विरोधी शक्तियां एकजुट हो जाती हैं और व्यक्तिगत रूप में या व्यापक तौर पर आक्रमण  करती हैं ताकि व्यक्ति वैयक्तिक रूप में जो ग्रहण कर सकता है उसमें, और व्यापक रूप से जो उतारा जा रहा है उसमें भी रोड़े अटका कर अवतरण में बाधक बन जायें। साथ ही, बहुधा, दर्शन-दिवस के बाद चाहती या उसे और आगे बढ़ने से रोकना चाहती हैं। लेकिन जहां तक व्यक्ति का सवाल है, इस प्रहार से गुजरने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि अगर व्यक्ति अपनी प्रकृति में सचेतन हो तो वह प्रतिक्रिया करके उसे दूर फेंक सकता है। या अगर वह विरोधी-शक्ति तब भी अपना जोर लगाये तो व्यक्ति अपनी इच्छा-शक्ति और श्रद्धा के बल-बूते पर उस अस्थायी बाधा से निकल कर अधिक महान् उद्घाटन और नयी प्रगति के प्रति खुल सकता है।

 

सन्दर्भ : श्रीअरविन्द अपने विषय में 

शेयर कीजिये

नए आलेख

स्थायी अचंचलता

ध्यान के द्वारा प्राप्त किया गया अचंचल मन सचमुच बहुत कम समय के लिए रहता…

% दिन पहले

शांति मंत्र

मैं तुम्हें अपना पुराना मन्त्र बताती हूं; यह बाह्य सत्ता को बहुत शान्त रखता है…

% दिन पहले

घर और काम में साधना

तुम्हारें लिए यह बिल्कुल संभव है कि तुम घर पर और अपने काम के बीच…

% दिन पहले

अपात्रता का भाव

अगर अपात्रता का भाव तुम्हें उमड़ती हुई कृतज्ञता से भर देता है और आनन्दातिरेक के…

% दिन पहले

दो चीज़ें

ये दो चीज़ें एकदम अनिवार्य है : सहनशक्ति और एक ऐसी श्रद्धा जिसे कोई भी…

% दिन पहले

कभी मत बुड़बुड़ाओ

कभी मत बुड़बुड़ाओ । जब तुम बुड्‌बुड़ाते हो तो तुम्हारे अन्दर सब तरह की शक्तियां…

% दिन पहले