डरने की कोई बात नहीं है- सब कुछ ‘परम प्रभु’ हैं– ‘परम प्रभु’ के सिवाय और कुछ नहीं है; एकमात्र भगवान् का ही अस्तित्व है और जो कुछ हमें डराने की कोशिश करता है वह केवल भगवान् का मूर्खतापूर्ण और अर्थहीन छद्मवेश है ।
हिम्मत रखो–तुम्हारे सामने मार्ग खुला है, बीमारी की इस मोहग्रस्तता को झाड़ फेंको और ‘भागवत शान्ति’ को नीचे उतारो ।
तब सब कुछ ठीक हो जायेगा ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग – २)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…