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चैत्य को जानना

चैत्य को जानने के लिये तुम्हें अपने प्राण की कामनाओं को जीत लेना और मन को नीरव कर देना चाहिये और फिर भगवान के प्रति निष्कपट समर्पण करना चाहिये जिनका मनुष्य के अन्दर चैत्य एक साधन है।

संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-२)

 

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