ग्रहणशील होने का अर्थ है, देने की प्रबल इच्छा का होना और तुम्हारें पास जो कुछ है, तुम जो कुछ हो और जो कुछ करते हो सब कुछ भगवान के कार्य के लिये अर्पण कर देना।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
भगवान के प्रति पूर्ण आत्म-दान के लिए तीन विशेष विधियाँ : (१) सारे गर्व को…
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…