श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

कुछ भी असंभव नहीं

… यदि तुम एक सामान्य व्यक्ति हो हो और यदि तुम कष्ट उठाओ और पद्धति से परिचित होओ तो, तुम्हारा विकास लगभग असीम होता है ।

ऐसी एक धारणा है कि प्रत्येक व्यक्ति एक विशेष प्रकार का होता है । उदाहरणार्थ, चीड़ कभी बलूत नहीं बनेगा और ताड़ कभी गेहूं नहीं बनेगा। यह स्पष्ट है। परंतु यह दूसरी बात है : उसका मतलब है कि तुम्हारी सत्ता का सत्य तुम्हारे पड़ोसी की सत्ता का सत्य नहीं है । परंतु अपनी सत्ता के सत्य में, तुम्हारें निजी गठन के अनुसार; तुम्हारी प्रगति की क्षमता लगभग असीम है । यह केवल तुम्हारें इस निजी विश्वास से सीमित है कि वह सीमित है और सच्ची प्रक्रिया के बारें में तुम्हारें अज्ञान से सीमित है, अन्यथा … ।

ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसे मनुष्य न कर सकें, बशर्ते कि वह उसे करने की विधि जानता हो ।

संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५६

शेयर कीजिये

नए आलेख

सच्ची वीरता

तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…

% दिन पहले

अच्छी नींद के लिए

अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…

% दिन पहले

भय और बीमारी

तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…

% दिन पहले

सच्ची करुणा

साधक को क्या होना चाहिये इसके बारे में मैं तुम्हारे भावों की कदर करती हूँ…

% दिन पहले

आशा

हमारी प्रकृति न केवल संकल्प और ज्ञान के क्षेत्र में प्रान्त है बल्कि शक्ति के…

% दिन पहले

परमात्मा हास्यप्रिय है

श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…

% दिन पहले