जब माताजी के साथ चम्पकलाल ने काम करना आरम्भ किया था तब माताजी ने वार्तालाप के समय ये बातें कही थीं | बाद में चम्पकलाल ने माताजी से इसे लिखकर देने की प्रार्थना की तब माताजी ने कृपा कर यह संदेश लिखकर दिया था :
सरल बनो |
प्रसन्न रहो |
शांत रहो |
अपना कार्य जितना हो सके उतनी पूर्णता के साथ करो |
अपने को सदैव मेरी और खुला रखो , तुमसे इसी सब की आशा की जाती है |
सन्दर्भ: चम्पकलाल की वाणी
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