माताजी और मैं दो रूपों में एक ही ‘शक्ति’ का प्रतिनिधित्व करते हैं – अतः स्वप्न में देखा हुआ तुम्हारा अंतरदर्शन पूरी तरह से तर्कसंगत था। ईश्वर-शक्ति, पुरुष प्रकृति एकमेव भगवान (ब्रह्मन) के दो पक्ष है।
संदर्भ : माताजी के विषय में
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…