मैं सभी बच्चों के साथ एक-सा व्यवहार करने के पक्ष में नहीं हूँ। इससे एक जैसा स्तर तो बन जाता है, यह पिछड़े हुए बच्चों के लिए लाभदायक होता है पर जो सामान्य ऊंचाई से ऊपर उठ सकते हैं उनके लिए हानिकर होता है ।
जो काम करना और सीखना चाहते हैं उन्हें प्रोत्साहन देना चाहिये, लेकिन जो पढ़ाई-लिखाई से कतराते हैं उनकी शक्ति को किसी और दिशा में मोड़ देना चाहिये।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१७)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…