दर्शन संदेश १५ अगस्त २०१८ (२/४)
सम्भ्वन की शाश्वतता में प्रत्येक अवतार एक अधिक पूर्ण सिद्धि का उद्घोषक और अग्रदूत होता है।
फिर भी लोगों में हमेशा यह वृत्ति रहती है कि भविष्य के अवतार के विरुद्ध भूतकाल के अवतार की पूजा करें।
अब फिर से श्रीअरविंद जगत के सामने आगामी कल की उपलब्धि की घोषणा करने आए हैं, और फिर से उनके संदेश का उसी तरह विरोध हो रहा जैसा उनसे पहले आने वालों का हुआ था।
लेकिन आगामी कल उनके द्वारा प्रकाश में लाये गए सती को प्रमाणित करेगा और उनका कार्य पूरा होगा।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-१)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…