हम इस समय फिर एक बार पृथ्वी के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर हैं। सब ओर से लोग मुझसे पूछ रहे हैं : ”अब क्या होने-वाला है?” हर जगह तीव्र व्यथा, प्रतीक्षा, भय की स्थिति है। ”अब क्या होने वाला है? ”
… इसका उत्तर, बस, एक ही है : ”यदि मानव आध्यात्मिक होने के लिये बस, तैयार हो जाये।”
संदर्भ : प्रश्न और उत्तर (१९५७-१९५८)
व्यापक दृष्टि से विचार करने पर मुझे ऐसा लगता है कि प्रचार करने योग्य सबसे…
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…