तुम्हें अपने अध्यवसाय में सच्चा होना चाहिये ; तब तुम आज जो चीजें नहीं कर सकती उन्हें नियमित और आग्रहपूर्ण प्रयासों के बाद एक दिन कर सकोगी।
अपने-आप को पूरी तरह भगवान के अर्पण कर दो । भागवत सहायता हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खंड-१७)
एक या दो बार, बस खेल-ही-खेलमें आपने अपनी या श्रीअरविंदकी कोई पुस्तक ली और सहसा…
मेरे प्यारे बालक, तुम हमेशा मेरी भुजाओं में रहते हो और मैं तुम्हें सुख-सुविधा देने,…