श्रेणियाँ श्री माँ के वचन

सामान्य प्रक्रिया

श्रीअरविंद कहते हैं कि तुम्हे सबसे पहले अपने विषय में सचेतन होना चाहिये, फिर सोचना, और फिर कार्य करना चाहिये। सभी कार्यों से पहले सत्ता के आन्तरिक सत्य का अंतरदर्शन प्राप्त होना चाहिये ; सर्वप्रथम सत्य का अंतदर्शन, फिर इस सत्य का विचार – रूप में सूत्रीकरण, फिर विचार द्वारा कर्म का सृजन होना चाहिये।

यही है सामान्य प्रक्रिया।

 संदर्भ : प्रश्न और उत्तर १९५६

शेयर कीजिये

नए आलेख

सतत उपस्थिति

​हमेशा इस तरह रहो मानों तुम परात्पर प्रभु और भगवती माता की आंखों के एकदम…

% दिन पहले

चैत्य पुरुष का प्रभुत्व

एक बच्चे की तरह बन जाना और अपने-आपको संपूर्णतः  दे देना तब तक असम्भव है…

% दिन पहले

साधना में दृढ़ आधार

समता के बिना साधना में दृढ़ आधार नहीं बन सकता। परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी अप्रिय…

% दिन पहले

भारत के लिये संदेश

​भारत को फिर से अपनी आत्मा को पाना और अभिव्यक्त करना होगा । संदर्भ : माताजी…

% दिन पहले

सोने का सही तरीका 

​सोने से पहले, जब तुम सोने के लिए लेटो, तो भौतिक रूप से अपने-आपको शिथिल…

% दिन पहले

श्रीमाँ को स्वप्न में देखना

मधुर माँ, क्या नींद में अपने ऊपर पूरी तरह नियंत्रण पाना संभव है ? उदाहरण…

% दिन पहले