कोई संगठन ठीक तरीके से चलें इसके लिए आवश्यक शर्तें है कि एक स्पष्ट और यथार्थ दृष्टि हो कि क्या करना है, और उसें कार्यान्वित करने के लिए स्थिर, शांत और दृढ़ इच्छा-शक्ति हो । और एक सामान्य नियम के अनुसार औरों से उन गुणों की मांग न करो जो स्वयं तुम्हारे अंदर नहीं है ।
संदर्भ : श्रीमातृवाणी (खण्ड-१७)
तुम पानी में गिर पड़ते हो। वह विपुल जलराशि तुम्हें भयभीत नहीं करती। तुम हाथ-पांव…
अंदर की बेचैनी ही तुम्हें आंतरिक और बाह्य रूप से नींद लेने से रोकती है।…
तुम्हें डरना नहीं चाहिये। तुम्हारी अधिकतर कठिनाइयां भय से आती है। वास्तव में, ९० प्रतिशत…
श्रीअरविंद ने कितनी ही बार इस बात को दोहराया है कि परमात्मा हास्यप्रिय हैं और…