रूपांतर के लिए भगवान को निरंतर याद रखना अनिवार्य है ।
और जब परम प्रेम की अभिव्यक्ति का दिन आयेगा, परम प्रेम के पारदर्शक, सघन अवतरण का दिन आयेगा तो वस्तुतः वही रूपान्तर का क्षण होगा। क्योंकि कोई चीज़ उसका प्रतिरोध न कर सकेगी ।
संदर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
श्रीअरविन्द सूक्ष्म-भौतिक में निरन्तर रहते हैं और वहां बहुत सक्रिय हैं। मैं प्रायः रोज उनसे…
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…