भगवान जब बुरी-से-बुरी परीक्षा लेते हैं तब वह अच्छे-से-अच्छा पथ दिखाते हैं, जब वह कठोरतापूर्वक दण्ड देते है तब वह संपूर्णतः प्रेम करते हैं, जब वह प्रचण्ड रूप से विरोध करते है तब वह पूर्ण रूप से सहायता करते हैं ।
संदर्भ : विचारमाला और सूत्रावली
हे माँ , मैं आपकी उपस्थिति का अनुभव क्यों नहीं करता ? मानसिक गतिविधि की…
कोई संस्था प्रगतिशील हुए बिना जीवित नहीं रह सकती। सच्ची प्रगति है हमेशा भगवान् के…