श्रीअरविंद आश्रम की श्रीमाँ
मेरी सलाह है : चिन्ता न करो। तुम उसके बारे में जितना अधिक सोचते हो उतना अधिक तुम उस पर एकाग्र होते हो, और उससे भी बढ़कर, तुम जितना अधिक डरते हो उतना ही उस चीज को बढ़ने का अवसर देते हो।
इसके विपरीत, अगर तुम अपना ध्यान और अपनी रुचि किसी और चीज की ओर मोड़ दो तो तुम रोगमुक्त होने की सम्भावनाओं को बढ़ाते हो।
सन्दर्भ : माताजी के वचन (भाग-३)
उनके दुःख-दर्द से तीव्र रूप से पीड़ित होकर मैं तेरी ओर मुड़ी और उसका उपचार…
भागवत शक्ति को ग्रहण करने की क्षमता प्राप्त करने तथा तुम्हारे माध्यम से बाह्य जीवन…
यह कभी न भूलो कि तुम अकेले नहीं हो । भगवान् तुम्हारे साथ हैं, तुम्हारी…
जहाँ कहीं तुम एक महान अंत देखो, निश्चित हो जाओ कि एक महान आरंभ हो…
हमें यादों से इतना स्नेह होता है क्योंकि वे सार्वभौमिक हैं। उनके अन्दर 'अनन्तता' के…